Monday, 2 February 2026

विकसित भारत का बजट

( संसद में बजट प्रस्तुत करने से पूर्व राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू के साथ वित्त मंत्री श्रीमति निर्मला सीतारमण) सौ - राष्ट्रपति भवन


2026 का केंद्रीय बजट: विकसित भारत की मजबूत नींव और मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व की झलक हैं! नमस्कार! हम उस महत्वपूर्ण आर्थिक दस्तावेज पर गहन चर्चा करेंगे जो न केवल भारत की वर्तमान आर्थिक दिशा को मजबूत करता है, बल्कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देश को एक नई ऊंचाई पर ले जाने का संकल्प दर्शाता है। 1 फरवरी, 2026 को वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में प्रस्तुत किया गया 2026-27 का केंद्रीय बजट, 'विकसित भारत 2047' के सपने को साकार करने की दिशा में एक मजबूत कदम है। यह बजट मात्र आंकड़ों और आवंटनों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह युवा शक्ति, आत्मनिर्भरता, समावेशी विकास और सतत प्रगति की एक जीवंत कहानी है। मोदी जी के विजन के तहत, यह बजट भारत को वैश्विक आर्थिक महाशक्ति बनाने की दिशा में ठोस और दूरगामी कदम उठाता है, जहां हर नागरिक, विशेषकर मध्यम वर्ग, गरीब, किसान, महिला और युवा, सीधे लाभान्वित होते हैं।पिछले एक दशक से अधिक समय में, मोदी सरकार ने भारत की अर्थव्यवस्था को वैश्विक चुनौतियों से उबारकर एक अटूट नींव प्रदान की है। कोविड-19 महामारी से लेकर भू-राजनीतिक संकटों और वैश्विक मंदी तक, देश ने अदम्य साहस के साथ सामना किया है। आज, भारत की जीडीपी विकास दर लगभग 7.4% पर बनी हुई है, मुद्रास्फीति नियंत्रित स्तर पर है, और विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच चुका है। यह बजट इसी प्रगति को और गति प्रदान करता है, जहां कुल व्यय 53,47,315 करोड़ रुपये अनुमानित है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 7.7% अधिक है। राजकोषीय घाटा 4.3% पर नियंत्रित रखा गया है, जो वित्तीय अनुशासन और जिम्मेदारी की स्पष्ट मिसाल है। पूंजीगत व्यय को 12.2 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाया गया है, जो इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, रोजगार सृजन और आर्थिक गति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह बजट 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास' के मंत्र को साकार करता है, जहां गरीबों, किसानों, महिलाओं, युवाओं और मध्यम वर्ग की आवश्यकताओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।मोदी जी के नेतृत्व में भारत ने न केवल आर्थिक सुधारों की एक श्रृंखला लागू की है, बल्कि वैश्विक पटल पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज की है। जी-20 की सफल अध्यक्षता से लेकर चंद्रयान-3 की सफलता तक, भारत ने दुनिया को अपनी क्षमता दिखाई है। हाल ही में यूरोपीय संघ के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) ने भारत की व्यापारिक क्षमता को नई ऊर्जा दी है, जो युवाओं और MSME के लिए नए अवसर पैदा करेगा। यह बजट इन उपलब्धियों को आगे बढ़ाते हुए, भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के रोडमैप का हिस्सा है। आइए, हम इस बजट के प्रमुख बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा करें और देखें कि यह देश की आर्थिक प्रगति को कैसे मजबूत करता है।बजट में देश के लिए क्या-क्या है?2026 का बजट एक व्यापक और समग्र दृष्टिकोण अपनाता है, जहां हर सेक्टर को मजबूती प्रदान की गई है। बजट का थीम 'युवा शक्ति-चालित विकास' है, जो भारत की जनसांख्यिकीय लाभांश को उत्पादक क्षमता में बदलने पर केंद्रित है। सबसे पहले, इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान दें, जो भारत की सड़कों, रेलों और परिवहन व्यवस्था को नई गति देगा। मोदी जी के नेतृत्व में, भारत ने इंफ्रास्ट्रक्चर को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया है, और 'गति शक्ति' योजना ने इसे क्रांतिकारी रूप दिया है। इस बजट में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय को 5,98,520 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो पिछले वर्ष से काफी अधिक है। सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे, जैसे मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलुरु, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बेंगलुरु, दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलिगुड़ी। ये कॉरिडोर न केवल यात्रा समय को आधा कर देंगे, बल्कि आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देंगे, व्यापार को सुगम बनाएंगे और क्षेत्रीय असमानताओं को कम करेंगे।इसके अलावा, 20 नए राष्ट्रीय जलमार्गों (नेशनल वाटरवेज) को चालू किया जाएगा, शुरूआत ओडिशा के NW-5 से, जो खनिज-समृद्ध क्षेत्रों जैसे तालचेर और अंगुल को कालिंगानगर जैसे औद्योगिक केंद्रों से जोड़ेंगे और परादीप तथा धामरा बंदरगाहों तक पहुंचाएंगे। यह माल ढुलाई को सस्ता और पर्यावरण-अनुकूल बनाएगा, क्योंकि जलमार्ग सड़क परिवहन की तुलना में कम कार्बन उत्सर्जन करते हैं। सड़कों की बात करें तो, समर्पित फ्रेट कॉरिडोर जैसे दनकुनी से सूरत तक का विकास, टियर-2 और टियर-3 शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करेगा। शहर आर्थिक क्षेत्र (सीईआर) की अवधारणा के तहत, प्रत्येक क्षेत्र को 5,000 करोड़ रुपये दिए जाएंगे, जो शहरी विकास को गति देगा और आर्थिक चक्र को बढ़ावा देगा। यह सब मोदी जी की 'गति शक्ति' योजना का विस्तार है, जिसने पिछले वर्षों में हजारों किलोमीटर सड़कें, पुल और सुरंगें बनाई हैं। उदाहरण के लिए, राष्ट्रीय राजमार्गों का विस्तार अब 1.5 लाख किलोमीटर से अधिक हो चुका है, और यह बजट इसे और आगे ले जाएगा। इससे न केवल यातायात सुगम होगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ेगा, लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी और निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।इसके अलावा, इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड की स्थापना से निजी डेवलपर्स को जोखिम कवर मिलेगा, जो निर्माण चरण में क्रेडिट गारंटी प्रदान करेगा। सीप्लेन VGF स्कीम से स्वदेशी सीप्लेन निर्माण को प्रोत्साहन मिलेगा, जो पर्यटन और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ाएगा। कोस्टल कार्गो प्रमोशन स्कीम से अंतर्देशीय जलमार्गों और तटीय शिपिंग का हिस्सा 6% से बढ़ाकर 2047 तक 12% किया जाएगा। ये सभी उपाय मोदी जी के विजन से प्रेरित हैं। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को इस बजट में विशेष महत्व दिया गया है। सात रणनीतिक और सीमांत क्षेत्रों में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए योजनाएं हैं, जैसे बायोफार्मा शक्ति योजना के तहत 10,000 करोड़ रुपये का आवंटन। भारत को वैश्विक बायोफार्मा हब बनाने का लक्ष्य है, जो दवाओं के उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ाएगा और निर्यात को बढ़ावा देगा। सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के लिए 40,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो चिप निर्माण को बढ़ावा देगा और इलेक्ट्रॉनिक्स वैल्यू चेन को मजबूत करेगा। दुर्लभ पृथ्वी गलियारों का विकास ओडिशा, केरल आदि राज्यों में होगा, जो महत्वपूर्ण खनिजों के खनन, प्रसंस्करण और उपयोग को मजबूत करेगा, जिससे इलेक्ट्रिक वाहन और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर लाभान्वित होंगे। पुराने औद्योगिक क्लस्टरों के पुनरुद्धार के लिए 200 क्लस्टर चुने गए हैं, जो कपड़ा, चमड़ा, जूते और अन्य पारंपरिक क्षेत्रों को नई जान देगा, रोजगार सृजित करेगा और निर्यात बढ़ाएगा।एमएसएमई सेक्टर, जो भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और जीडीपी में 30% योगदान देता है, को 'चैंपियन एमएसएमई' बनाने के लिए इक्विटी, लिक्विडिटी और पेशेवर समर्थन प्रदान किया जाएगा। एसएमई ग्रोथ फंड के लिए 10,000 करोड़ रुपये और सेल्फ-रिलायंट इंडिया फंड में 2,000 करोड़ रुपये का टॉप-अप किया गया है। यह छोटे उद्यमियों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाएगा, क्रेडिट गारंटी बढ़ाएगा और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन को प्रोत्साहित करेगा। कृषि क्षेत्र में भी कई नवाचार हैं। मछली पालन, नारियल, काजू और कोको जैसे फसलों के लिए विशेष कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाएगा, साथ ही पशुपालन में उद्यमिता के लिए सब्सिडी प्रदान की जाएगी। धन-धान्य कृषि योजना से उच्च उपज वाली फसलों को बढ़ावा मिलेगा, और भारत-विस्तार योजना के तहत एग्रीस्टैक और एआई का एकीकरण किसानों की उत्पादकता बढ़ाएगा, मौसम पूर्वानुमान सुधारेगा और बाजार पहुंच को बेहतर बनाएगा। उत्पादकता-आधारित विकास से किसानों की आय बढ़ेगी, और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।शिक्षा और स्वास्थ्य पर भी विशेष जोर है। शिक्षा से रोजगार और उद्यमिता तक की स्थायी समिति गठित की जाएगी, जो पाठ्यक्रम को रोजगार-उन्मुख बनाएगी। 15,000 स्कूलों और 500 कॉलेजों में AVGC (एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स) कंटेंट क्रिएटर लैब्स स्थापित किए जाएंगे, जो युवाओं को क्रिएटिव इंडस्ट्री में तैयार करेंगे और ऑरेंज इकोनॉमी को बढ़ावा देंगे। स्वास्थ्य में, बायोफार्मा के अलावा, तीन नए NIPER (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च) और सात संस्थानों का अपग्रेडेशन किया जाएगा। आयुष संस्थानों का विस्तार होगा, और मानसिक स्वास्थ्य के लिए नए केंद्र स्थापित किए जाएंगे। कैंसर दवाओं पर कस्टम ड्यूटी में कमी से इलाज सस्ता होगा। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 15 पुरातात्विक स्थलों का विकास किया जाएगा, और ग्लोबल बिग कैट समिट का आयोजन होगा, जो इको-टूरिज्म को प्रोत्साहित करेगा।एनर्जी ट्रांजिशन के लिए कार्बन कैप्चर यूटिलाइजेशन एंड स्टोरेज (CCUS) योजना में 20,000 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है, जो पावर, स्टील, सीमेंट, रिफाइनरी और केमिकल्स जैसे क्षेत्रों में हरित तकनीकों को बढ़ावा देगा। सोलर ग्लास और लिथियम-आयन सेल्स पर ड्यूटी छूट से हरित ऊर्जा को प्रोत्साहन मिलेगा, और भारत के जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद मिलेगी। रक्षा क्षेत्र में रिकॉर्ड 7,84,678 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जो पिछले वर्ष से 15.18% अधिक है, और कैपिटल आउटले में 21.83% वृद्धि से आधुनिकीकरण को गति मिलेगी। IFSC में एयरक्राफ्ट और शिप लीजिंग के लिए टैक्स हॉलिडे को 20 वर्ष तक बढ़ाया गया है।बजट से देश को क्या लाभ मिलेगा?यह बजट न केवल वर्तमान चुनौतियों का समाधान करता है, बल्कि भविष्य की मजबूत नींव रखता है। इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास से, विशेषकर सड़कों, रेलों और जलमार्गों से, माल ढुलाई की लागत कम होगी, जो मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखेगी और निर्यात को प्रतिस्पर्धी बनाएगी। हाई-स्पीड रेल से यात्रा समय आधा हो जाएगा, जिससे व्यापार, पर्यटन और क्षेत्रीय एकीकरण बढ़ेगा। अनुमान है कि इससे अगले पांच वर्षों में 10 लाख से अधिक नए रोजगार सृजित होंगे। मैन्युफैक्चरिंग के फोकस से, भारत की निर्यात क्षमता बढ़ेगी। सेमीकंडक्टर और बायोफार्मा में निवेश से आयात पर निर्भरता कम होगी, और वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की भूमिका मजबूत होगी। MSME को मजबूती से, छोटे व्यवसाय फलेंगे-फूलेंगे, जो जीडीपी में 30% योगदान देते हैं और करोड़ों रोजगार प्रदान करते हैं। कृषि में नवाचार से किसानों की आय दोगुनी होने की दिशा में प्रगति होगी, और ग्रामीण उपभोग बढ़ेगा।शिक्षा और स्वास्थ्य के निवेश से मानव पूंजी मजबूत होगी, जो लंबे समय में उत्पादकता बढ़ाएगी और डेमोग्राफिक डिविडेंड को अधिकतम करेगी। एनर्जी ट्रांजिशन से भारत जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करेगा, और सतत विकास सुनिश्चित होगा, जो वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करेगा। कुल मिलाकर, यह बजट आर्थिक विकास को 8% तक पहुंचाने का लक्ष्य रखता है, बेरोजगारी कम करेगा और आय असमानता को घटाएगा। मोदी जी के नेतृत्व में, भारत ने पहले ही 25 करोड़ लोगों को बहुआयामी गरीबी से बाहर निकाला है, और यह बजट उस यात्रा को जारी रखेगा।भविष्य में इस बजट की महत्वता2026 का बजट 'विकसित भारत 2047' के रोडमैप का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मोदी जी के नेतृत्व में, भारत ने जी-20 अध्यक्षता से लेकर चंद्रयान मिशन तक, वैश्विक पटल पर अपनी छाप छोड़ी है। यह बजट उस यात्रा को जारी रखता है, जहां राजकोषीय घाटे को 4.3% पर रखकर, ऋण-जीडीपी अनुपात को 50% ±1% तक लाने का लक्ष्य है। एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग और उभरती तकनीकों के प्रभाव का मूल्यांकन कर, हम भविष्य-तैयार कार्यबल तैयार करेंगे। पूर्वोदय योजना के तहत पूर्वी भारत का एकीकृत विकास होगा, जो क्षेत्रीय असमानताओं को कम करेगा। शहरों और ग्रामीणों के बीच की खाई कम होगी, और वैश्विक चुनौतियों जैसे व्यापार युद्धों में आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करेगा।यह बजट दीर्घकालिक है, जहां MSME और मैन्युफैक्चरिंग से 'मेक इन इंडिया' को नई गति मिलेगी, और IFSC जैसे गिफ्ट सिटी को वैश्विक फाइनेंशियल हब बनाया जाएगा। अनुमान है कि इससे जीडीपी विकास 8% तक पहुंच सकता है, बेरोजगारी कम होगी, और भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा। मोदी जी का विजन 'विकसित भारत' को साकार करने का है, जहां हर भारतीय समृद्ध और सशक्त हो।नागरिकों को लाभ सामान्य नागरिकों के लिए, यह बजट कई प्रत्यक्ष राहतें और अवसर लाता है। स्वास्थ्य में नए ट्रॉमा सेंटर और मानसिक स्वास्थ्य संस्थान स्थापित किए जाएंगे, जो महामारी के बाद की चुनौतियों से निपटने में मदद करेंगे। विकलांगों के लिए दिव्यांग कौशल योजना और सहारा योजना उन्हें स्वावलंबी बनाएगी। महिलाओं के लिए SHE मार्ट्स और हर जिले में लड़कियों के लिए हॉस्टल स्थापित किए जाएंगे, जो महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देंगे। गरीबों के लिए आवास योजनाओं का विस्तार और आयुष्मान भारत का मजबूतीकरण स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करेगा। किसानों को उच्च उपज वाली फसलों से आय बढ़ेगी, और युवाओं को AVGC लैब्स से क्रिएटिव जॉब्स मिलेंगे।मिडिल क्लास को लाभमध्यम वर्ग, जो करदाताओं की रीढ़ है और अर्थव्यवस्था को गति देता है, को विशेष लाभ प्रदान किए गए हैं। आयकर स्लैब में कोई बदलाव नहीं है, लेकिन सरलीकरण से फॉर्म आसान होंगे और अनुपालन सरल होगा। विदेशी यात्रा पैकेज पर TCS को 2% तक कम किया गया है, साथ ही शिक्षा और चिकित्सा पर भी 2% TCS। रिटर्न फाइलिंग की समयसीमा बढ़ाई गई है, और छोटे विदेशी एसेट्स पर छूट प्रदान की गई है। मोटर दुर्घटना क्लेम्स पर ब्याज को कर-मुक्त किया गया है। ये कदम मध्यम वर्ग की क्रय शक्ति बढ़ाएंगे, बचत को प्रोत्साहित करेंगे और जीवन स्तर को ऊंचा उठाएंगे। आवास योजनाओं में वृद्धि से घर खरीदना आसान होगा, और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास से दैनिक जीवन सुगम बनेगा।2026 का बजट मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व का प्रमाण है, जो भारत को वैश्विक नेता बनाएगा। यह न केवल आर्थिक, बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय प्रगति का ब्लूप्रिंट है। 

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