Wednesday, 6 October 2021

दुर्गा पूजा ( उत्सव )

हम सभी जानते है की दुर्गा पूजा भारत के सबसे लोकप्रिय पर्व है जो कि शक्ति की देवी माँ दुर्गा को समर्पित है।
इस अवसर पर में सभी देशवासियो को बहुत बहुत शुभकामनाएं देता हूँ।

माँ दुर्गा और एक मनुष्य में रिश्ता क्या है।
हमारे शास्त्रों में कहा गया है
'' कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता न भवति ''
( दुर्गासप्तशती (देव्यापरध्क्षमानस्त्रोतम ) श्लोक 4 के 2 लाइन )
इसका अर्थ है कि पुत्र कुपत्र हो सकता है, लेकिन माता कुमाता नही हो सकती है।
यही रिश्ता माँ जगदम्बे और एक मनुष्य में है।
दुर्गा पूजा 10 दिनों तक चलता है। इसमें माँ दुर्गा के 9 रूपो की पूजा की जाती है।
इसी पर श्री दुर्गासप्तशती में एक श्लोक है कि
प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।
तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम् ।।
पंचमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च।
सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम् ।।
नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा: प्रकीर्तिता:।
उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना ।। 
इसमें माँ के 9 रूपो का नाम अंकित है। ये सभी माँ के अलग अलग रूपो के कार्य को समर्पित है।
जैसा , की हम सभी इस बात से अवगत है कि, दुर्गा पूजा भारत मे सबसे ज्यादा लोकप्रिय बंगाल राज्य में है। क्योंकि बंगाल के इष्टदेव माँ दुर्गा है।

एक मानव के लिए इस त्योहार का मतलब है, की असत्य पर सत्य के विजय का त्योहार है दशहरा इसे विजयदशमी भी इसीलिए कहा जाता है।
दुर्गा पूजा में कई जगह मेले, खेलकुद और सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया जाता है । इसमें घर के बच्चे, बूढ़े पूजा पाठ के साथ इन सभी आयोजन का भी आंनद लेते है।

इस विषय पर में अपना व्यक्तिगत अनुभव भी साझा करना चाहता हूँ।
मेरे  घर के सभी लोग माँ की पूजा करने से पहले अलग अलग फूलो से माँ की पंडाल सजाते है। फिर माता को विराजमान कर उनकी पूजा करते है।
माँ दुर्गा जगतजननी को समर्पित ये त्योहार सभी के मन मे नई ऊर्जा का संचार करती है।
और दस वे दिन माँ को सम्मान और नम आंखों से उन्हें विसर्जन कर उनकी विदाई करते है।
में पुनः सभी देशवासियो को दुर्गा पूजा की शुभकामनाएं देता हूँ।

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