मेरे प्यारे बिहारवासियों, आज हम एक साथ उस धरती की यात्रा पर निकलते हैं जो न केवल भारत की, बल्कि समूची विश्व सभ्यता की जननी है। नालंदा महाविहार तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व से तेरहवीं शताब्दी ईस्वी तक विश्व का पहला आवासीय विश्वविद्यालय था। यहाँ हज़ारों छात्र-छात्राएँ चीन, जापान, कोरिया, तिब्बत और मंगोलिया से आकर ज्ञान प्राप्त करते थे। नालंदा की विशाल पुस्तकालयों में लाखों पांडुलिपियाँ थीं जो बाद में आग की लपटों में जल गईं, लेकिन उनकी ज्योति आज भी पूरी दुनिया को रोशन कर रही है। 2016 में यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर घोषित किया। ठीक इसी तरह बोधगया का महाबोधि मंदिर वह पावन स्थल है जहाँ भगवान गौतम बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ। 2002 में यूनेस्को ने इसे भी विश्व धरोहर का दर्जा दिया। राजगीर, विक्रमशिला और प्राचीन पाटलिपुत्र मौर्य और गुप्त साम्राज्यों की राजधानी रहे। जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर का जन्म भी इसी धरती पर हुआ। इसी मिट्टी से निकले महान मनीषी – चाणक्य जिन्होंने मौर्य साम्राज्य की नींव रखी, आर्यभट्ट जिन्होंने शून्य की खोज की और गणित को नई दिशा दी, कालिदास जिन्होंने साहित्य को अमर बना दिया और पाणिनि जिन्होंने व्याकरण का आधार तैयार किया। बिहार की यह भूमि न केवल भारत को, बल्कि समूची एशियाई सभ्यता को आकार देने वाली रही है।इस पुरातात्विक गौरव के साथ-साथ बिहार की सांस्कृतिक विरासत भी जीवंत है। सबसे प्रमुख है छठ महापर्व। सूर्य देव और छठी माई को अर्घ्य देने की यह परंपरा केवल श्रद्धा का नहीं, बल्कि शुद्धता, पर्यावरण संरक्षण और महिलाओं की सामर्थ्य का भी प्रतीक है। छठ के दौरान गंगा, कावेरी, फल्गु और स्थानीय जलाशयों के किनारे लाखों बिहारी एकजुट होकर प्रकृति को नमन करते हैं। मधुबनी चित्रकला, जो यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर है, बिहार की महिलाओं की कल्पना शक्ति और रंगों के माध्यम से जीवन की कहानियाँ कहती है। भिखारी ठाकुर का बिदेसिया नाटक, दरभंगा घराने का ध्रुपद गायन, उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ की शहनाई की मधुर धुन, झिझिया नृत्य, जत-जतिन और पैनकी – ये सब बिहार की सांस्कृतिक धरोहर को अमर बनाए हुए हैं। एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला सोनेपुर मेला और राजगीर महोत्सव इन परंपराओं को हर साल नई ऊर्जा प्रदान करते हैं।अब बात करते हैं मेरी जन्मभूमि सिंहेश्वर की। मधेपुरा जिले में स्थित सिंहेश्वर स्थान (सिंहेश्वर स्थान) रामायण काल से जुड़ी पावन भूमि है। कथा है कि राजा दशरथ को संतान न होने पर ऋषि शृंगी ने यहीं पुत्रेष्टि यज्ञ किया था। सात हवन-कुंड आज भी तालाब के रूप में मौजूद हैं और साक्षी हैं उस प्राचीन यज्ञ के जिसे आज वर्तमान में सतोखर कहते है। शिवलिंग को “कामनालिंग” कहा जाता है क्योंकि यहाँ हर इच्छा पूरी होती है। मंदिर गुप्त काल (तीसरी-चौथी शताब्दी) का है। महाशिवरात्रि और श्रावण मास में लाखों श्रद्धालु यहाँ दर्शन के लिए आते हैं। नेपाल से भी भक्त आते हैं। सिंहेश्वर केवल एक मंदिर नहीं है, बल्कि बिहार की आध्यात्मिक निरंतरता का प्रतीक है – जहाँ रामायण की प्राचीन कथा और आज की श्रद्धा एकाकार हो जाती है। पुरातात्विक और सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ बिहार आज आर्थिक रूप से भी नई ऊँचाइयों को छू रहा है। बिहार आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार 2024-25 में राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) मौजूदा कीमतों पर 9,91,997 करोड़ रुपये रहा। वृद्धि दर 13.1 प्रतिशत रही जो पूरे भारत की 9.8 प्रतिशत से कहीं अधिक है। स्थिर कीमतों पर वृद्धि 8.6 प्रतिशत रही। प्रति व्यक्ति GSDP 76,490 रुपये हो गया। द्वितीयक क्षेत्र यानी उद्योग और निर्माण में 11.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। पूंजीगत व्यय का अनुपात 22.3 प्रतिशत तक पहुँच गया। सड़कों, पुलों, पटना मेट्रो और बुनियादी ढाँचे में अभूतपूर्व निवेश हो रहा है। 2025-26 के लिए GSDP का अनुमान 10.97 लाख करोड़ रुपये के आसपास है। बिहार अब भारत के सबसे तेजी से बढ़ते राज्यों में शामिल है। कृषि से उद्योग की ओर संरचनात्मक बदलाव, मानव संसाधन विकास, स्टार्टअप और डिजिटल कनेक्टिविटी बिहार को नई ऊँचाइयों पर ले जा रहे हैं।बिहार की विशेषताएँ भी अनोखी हैं। यहाँ का लोक-जीवन लिट्टी-चोखा, मखाना और सूजी के हलवे से सजा है। मेहनती युवा शक्ति, IIT पटना और नालंदा विश्वविद्यालय का पुनरुत्थान शिक्षा को नई दिशा दे रहे हैं। महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य और शिक्षा में निरंतर सुधार हो रहा है। स्वतंत्रता संग्राम में चंपारण सत्याग्रह (1917) – महात्मा गांधी का भारत का पहला सत्याग्रह – इसी धरती पर हुआ। डॉ. राजेंद्र प्रसाद, जयप्रकाश नारायण, अनुग्रह नारायण सिंह जैसे महान सेनानियों ने बिहार को गौरवान्वित किया।प्रिय बिहारवासियों, सिंहेश्वर की पावन भूमि से लेकर नालंदा के खंडहरों तक, छठ के अर्घ्य से लेकर पटना की आधुनिक सड़कों तक – बिहार हर कण में गौरव भरा है।
आइए, अपनी विरासत को संजोएँ और भविष्य को गढ़ें। जय बिहार! जय बिहार 🙏🙏
कुमार हर्ष सिंह
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