But the minority who is in the overwhelming majority, that is, Muslims, why are they the only problem. We need to understand this. It is very unfortunate that when all of us today talk about following the paths of Babasaheb Ambedkar,Then we do not think that what were the views of Babasaheb Bhimrao Ambedkar ji on Uniform Civil Code. Today only Babasaheb is used by politicians for politics. He said in the Constituent Assembly "In a modern democracy, inequality, discrimination cannot be removed without reducing the right of religious sphere. It should be the responsibility of the country to adopt Uniform Civil Code." But today we do selective support of Babasaheb. The one who suits our politics is right, the one who doesn't suit is wrong. Those who make such statements should be ashamed.Jamiat Ulema-e-Hind passed a resolution saying that they will oppose the Uniform Civil Code. Today I would like to ask him whether he does not believe in Babasaheb Ambedkar ji and the constitution composed by him. In the Constituent Assembly he said.Today Hon'ble Home Minister Shri @AmitShah ji is supporting Uniform Civil Code and also that BJP led Hon'ble Narendra Modi Govt will bring law. This is a true tribute to Babasaheb Ambedkar.Owaisi and other such leaders who do politics by taking the name of Babasaheb Ambedkar oppose the Uniform Civil Code supported by Babasaheb. This is their duplicity.
Monday, 20 February 2023
Uniform Civil Code Need Of Hour or The Matter Of Poltics.
All Indian Muslim Personal Law Board is saying that Uniform Civil Code is against Muslims. This is a very unfortunate statement, it is not for any particular religion. Christians, Buddhists, Parsis, Jains are also minorities in India but they have no problem with it.
Monday, 4 July 2022
Violation of media freedom by Congress ruled states.
The way the first journalist Aman Chopra comes to be arrested by the police on the orders of the Government of Rajasthan without informing the UP Police. Similarly, today again Chhattisgarh Police has reached to arrest journalist Rohit Ranjan without informing UP Police. Such incidents raise questions on the freedom of the media. This dictatorial government uses all gimmicks to please its masters, which is very sad for a healthy democracy. It works to spoil Indian democratic values. It is said that democracy is destroyed when power dominates over truth. Today again Congress ruled states have proved that truth doesn't matter to them, their bosses matter to them. Today those so called journalists who do not see the freedom of media in India,today they will say something against the CM of CG.Does Zee News anchor @irohitr need to be arrested even after apologizing for his mistake? Is the action of CG Police justified as per law? In this regard, whether the law was followed by the police of Chhattisgarh, whether information was given to the local police. Isn't this a violation of the Supreme Court order? What notice was given? The police will have to answer all these questions. The intellectuals who cry for freedom of media said today. Will you condemn the attack on the fourth pillar of democracy today? I request @ghaziabadpolice to take strong action.
Thursday, 17 March 2022
समस्त देशवासियो को रंगों के त्योहार होली की बहुत बहुत शुभकामनाएं।
रंगों के त्योहार होली की समस्त देशवासियो को बहुत बहुत शुभकामनाएं।
रंगों के त्योहार होली के शुभ अवसर पर मैं देशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देता हूं।देशभर में पारंपरिक हर्षोल्लास एवं उत्साह के साथ मनाया जाने वाला होली का त्योहार परिवार एवं मित्रों के साथ मिलने और जीवन की स्फूर्त एवं आनंदमयी उत्सव की भावना का आनंद लेने का अवसर है।होली के इस पावन अवसर पर, आइए हम अपने समाज को एक सूत्र में पिरोकर रखने वाली मित्रता और मेल-जोल के बंधन को मजबूत करने का प्रयास करें। ये पर्व किसी धर्म के लिए नही ये मानवता को समर्पित है। ये अधर्म पर धर्म की विजय का त्योहार है। ये पर्व समाजिक सौहार्द बनाने का पर्व है।
में ईश्वर से यह कामना करता हूँ कि यह त्योहार हमारे जीवन में शांति, सौहार्द, समृद्धि और खुशियां लेकर आए।
Monday, 28 February 2022
सिंघेश्वर और महाशिवरात्रि।
(मुख्य मंदिर बाबा सिंघेश्वर नाथ, मधेपुरा(बिहार)
आज हम सभी महाशिवरात्रि का पावन त्योहार मनाएंगे।
मेरा शोभाग्य है कि में बाबा सिंघेश्वर नाथ के पावन धरती पर जन्म लिया। में आपको सिंघेश्वर के इतिहास के विषय मे जानकारी देना चाहता हूं।
कोशी के मध्य क्षेत्र में विराजित बाबा सिंघेश्वर नाथ शिवलिंग की प्राचीनता का काल निर्धारण अभी तक सुनिश्चित नही हो पाया है।
प्रशिद्ध लेखक श्री हरिशंकर श्रीवास्तव "शलभ" द्वारा रचित पुस्तक "शैव अवधारणा" और "सिंघेश्वर स्थान" विद्वानों की शवेशना कि मंजिल की और अग्रसर होने की दिशा में मिल का पत्थर सिद्ध होगा।
मंदिर का संचालन करने वाला स्वामित्व न्यास श्री सिंघेश्वर मंदिर न्यास समिति है, उसने वर्ष 1999ई० में एक स्मारिका जारी की थी। उसमें ये उल्लेख किया गया है।
"प्राचीन देवस्थलों की व्यवस्था का एक सा ही इतिहास रहा है। उनके प्रारंभिक काल मे उसकी देखरेख, व्यवस्था एव पूजा पाठ वहां के स्थानीय मूल निवासी ही करते रहे है। पर उन देवस्थलों की सिद्धि और ख्याति को सुनकर बाद में वहां पुजारी, पंडित और पंडा समाज पहुँच जाते है और धीरे धीरे वहां की व्यवस्था पर अपनी चतुराई से हावी होकर स्वयं पूजा पाठ के प्रभारी बन जाते है। सिंघेश्वर का शिवलिंग भी इसका अपवाद नही है। श्री सलभ ने अपनी उक्त पुस्तिका में लिखा है कि यहां के प्राचीन निवासी व्रात्य थे जो द्विजाति और उपनयन से च्युत थे। वे ब्राह्मणों के यज्ञ, पशु बलि और खर्चीले कर्मकांड के घोर विरोधी थे। वे शिवभक्त थे।
शिव के पावन नगरी सिंघेश्वर की स्वतंत्रता आंदोलन में भी बड़ी भूमिका थी, जिसका उल्लेख श्री डॉ भूपेंद्र ना०यादव ने अपनी आलेख में किया।
ये सभी बाते सिंघेश्वर के इतिहास के विषय मे थी। अब आपको हम महाशिवरात्रि के विषय मे बताऊंगा, शिवरात्रि से लगातार चार दिनों तक प्रातः आरती नही होती है। लेकिन दोपहर और रात्रि आरती जारी रहती है।
शिवरात्रि के दिन मंदिर में बहुत भीड़ रहती है ।
और मंदिर न्यास के आदेशानुसार दोपहर 3 बजे शिव जी का चांदी की प्रतिमा को बारात के लिए सजाकर मंदिर के गर्व गृह ले जाया जाता है। इसकी निगरानी न्यास करती है। उसके बाद गर्व गृह में पंडा समाज कई स्तुति, और अन्य स्त्रोत का उच्चारण किया जाता है। तत्पश्चात बाबा के प्रतिमा और शिवलिंग को गुलाल से भर दिया जाता है।
उसके बाद न्यास के पदाधिकारी द्वारा बारात रवाना किया जाता है। उसके बाद बाबा की बारात मंदिर परिसर से गौरीपुर (जहाँ मा पार्वती विराजमान है) वहा बारात जाती है।
वहां विधि विधान से पूजा के बाद बाबा की प्रतिमा वापस मंदिर आ जाती है। जिसे की मंदिर प्रांगण में स्थित मां पार्वती के मंदिर में रखा जाता है। उसके बाद बाबा की शिवलिंग का श्रृंगार और शादी की प्रक्रिया शुरू की जाती है। और श्रृंगार के पश्च्यात दूल्हे वाली पगड़ी पहनाई जाती है। ये पूजा लगातार चार दिनों तक यानी चौटारी तक होती है। और इसके बाद आरती की जाती है। फिर माँ पार्वती मंदिर में बाबा और मैया की फेरे होते है। और अन्य विशेष पूजा होती है। उसी दिन से विश्व विख्यात सिंघेश्वर मेले का प्रारंभ होता है। जो लगभग 1 महीने तक चलता है।
महाशिवरात्रि के एक दिन बाद जलधरी होता है इस दिन सभी श्रद्धालु आधी रात से बाबा के पट खुलने बाद जल अर्पण करते है। ऐसे ही ये पावन पर्व समाप्त होता है।
आप सभी को महाशिवरात्रि की बहुत बहुत शुभकामनाएं।- हर्ष
Friday, 4 February 2022
बाबा सिंघेश्वर का तिलकोत्सव।
( श्री सिंघेश्वर नाथ मंदिर (सिंघेश्वर) मंदिर)
प्रत्येक वर्ष वसंत पंचमी अर्थात सरस्वती पूजन के दिन महादेव बाबा सिंघेश्वर नाथ जी का तिलक उत्सव होता है, और महाशिवरात्रि को उनकी विवाह माँ पार्वती से विधि अनुसार किया जाता है। तिलक के दिन महादेव के शयन आरती में विशेष पूजा होती है। उस दिन बाबा को हल्दी से रंग किया हुआ वस्त्र बाबा को पहनाया जाता है, विशेष प्रकार के भोग बाबा को चढ़ाई जाती है। रंग , गुलाल से बाबा का स्नान कराया जाता है। और बाबा को तिलक लगाया जाता है। वसंत पंचमी से लेकर होली तक बाबा को विशेष रूप से गुलाल चढ़ाया जाता है। और शिवरात्रि को बाबा का विवाह (डोर) के माध्यम से मैया पार्वती से कराया जाता है। इस वर्ष मंदिर आम श्रद्धालुओ के बंद किया गया है, लेकिन बाबा के तिलक उत्सव का कार्यक्रम का सीधा प्रसारण मेरे फेसबुक और ट्विटर पर किया जाएगा।
Thursday, 20 January 2022
अमर जवान ज्योति बुझाई नही राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में विलीन किया गया है।
( राष्ट्रीय युद्ध स्मारक नई दिल्ली (file))
Blog- Kumar Harsh (Editor In Chief) Desh Ki Vaani
अमर जवान ज्योति की लौ को लेकर तरह-तरह की भ्रांतियां फैल रही हैं।
यहाँ सही दृष्टिकोण है:
अमर जवान ज्योति की लौ बुझ नहीं रही है। इसे राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में ज्वाला में विलीन किया जा रहा है।
यह देखना अजीब था कि अमर जवान ज्योति की लौ ने 1971 और अन्य युद्धों के शहीदों को श्रद्धांजलि दी, लेकिन उनका कोई नाम वहां मौजूद नहीं है। 1971 और उससे पहले और बाद के युद्धों सहित सभी युद्धों के सभी भारतीय शहीद के नाम राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में रखे गए है। इसीलिए वहां शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करना एक सच्ची श्रद्धांजलि है। विडम्बना यह है कि जिन लोगों ने 7 दशकों तक राष्ट्रीय युद्ध स्मारक नहीं बनाया, वे अब हमारे शहीदों को स्थायी और उचित श्रद्धांजलि देने पर हंगामा कर रहे हैं।
Monday, 15 November 2021
हिन्दू और हिंदुत्व
नमस्कार साथियो,
आज कुछ दिनों से आप देख रहे होंगे कि सभी राजनीतिक दल और नेताओं हिन्दू हिंदुत्व की बात कर रहे है, ये शुरू हुआ जब वरिष्ट अधिवक्ता और पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने अपनी नई किताब अयोध्या में हिन्दू और हिंदुत्व पर विवादित बयान दे दिया उन्होंने हिंदुत्व की तुलना बोको हराम और ISIS से की। जिसके समर्थन में पूरे कांग्रेस आ गयी ,और तो और वायनाड से कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने हिन्दू और हिंदुत्व को अलग बता दिया और कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने जय श्री राम कहने वालों को निशाचर बताया।
इस मामले पर बीजेपी प्रवक्ता डॉ संबित पात्रा ने इसे हिन्दू धर्म पर प्रहार बताया, और इसे कांग्रेस की हिन्दू विरोधी सोच का परिणाम बताया और तो और बीजेपी के राज्य सभा सांसद डॉ सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि 2014 से पहले भारत आंशिक रूप से मुस्लिम राष्ट्र बताया।
जो लोग आज हिन्दू और हिंदुत्व को अलग अलग बता रहे है, उनसे में यह पूछना चाहूंगा कि यदि हिन्दू और हिंदुत्व अलग है तोह इस्लाम और इस्लामिस्ट भी अलग अलग होनी चाहिए ?
( श्रीमती सोनिया गांधी (अध्य्क्ष) भारतीय राष्ट्र कांग्रेस)
आज हिन्दू पर ऐसी टिप्पणी हिन्दू धर्म को मानने वालों को आहत करती है। ये लोग राजनीति के लिए कुछ भी कर सकते है, ये तोह कुछ नही जब इन्होंने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर राम के अस्तित्व पर सवाल उठाया था, बार बार हिन्दू समुदाय को आहत करने वाले बयानों पर कांग्रेस अध्य्क्ष श्रीमति सोनिया गांधी को कांग्रेस का स्टैंड बताना चाहिए।
हमारी हिन्दू संस्कृति हमे सभी धर्मों का सम्मान करने कहता है। लेकिन जब भी हमारे धर्म पर कोई सवाल करता है तोह हमे
" धर्मो रक्षति रक्षता: " के भावना रखते हुए, कोई हिंसा किये बगैर शांति पूर्ण तरीके से इसका विरोध जतानी चाहिए, लेकिन कल जो नैनीताल में कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद के घर पर हमला बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
हमे न्यायपालिका पे भरोसा रखनी चाहिए, और माननीय न्यायालय को भी स्वत: संज्ञान लेकर दोषियों के खिलाफ कार्यवाही करनी चाहिए।
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