Tuesday, 29 June 2021

शिव जी के प्रिय मंत्र महामृत्युंजय की उत्पत्ति



!! किसने की #महामृत्युंजय_मंत्र की रचना और जाने इसकी शक्ति !!

शिवजी के अनन्य भक्त #मृकण्ड_ऋषि संतानहीन होने के कारण दुखी थे। विधाता ने उन्हें संतान योग नहीं दिया था।

मृकण्ड ने सोचा कि महादेव संसार के सारे विधान बदल सकते हैं। इसलिए क्यों न भोलेनाथ को प्रसन्नकर यह विधान बदलवाया जाए।

मृकण्ड ने घोर तप किया। भोलेनाथ मृकण्ड के तप का कारण जानते थे इसलिए उन्होंने शीघ्र दर्शन न दिया लेकिन भक्त की भक्ति के आगे भोले झुक ही जाते हैं।

महादेव प्रसन्न हुए. उन्होंने ऋषि को कहा कि मैं विधान को बदलकर तुम्हें पुत्र का वरदान दे रहा हूं लेकिन इस वरदान के साथ हर्ष के साथ विषाद भी होगा।

भोलेनाथ के वरदान से मृकण्ड को पुत्र हुआ जिसका नाम #मार्कण्डेय पड़ा। ज्योतिषियों ने मृकण्ड को बताया कि यह विलक्ष्ण बालक अल्पायु है। इसकी उम्र केवल 12 वर्ष है।

ऋषि का हर्ष विषाद में बदल गया। मृकण्ड ने अपनी पत्नी को आश्वत किया- जिस ईश्वर की कृपा से संतान हुई है वही भोले इसकी रक्षा करेंगे। भाग्य को बदल देना उनके लिए सरल कार्य है।

मार्कण्डेय बड़े होने लगे तो पिता ने उन्हें शिवमंत्र की दीक्षा दी। मार्कण्डेय की माता बालक के उम्र बढ़ने से चिंतित रहती थी। उन्होंने मार्कण्डेय को अल्पायु होने की बात बता दी।

मार्कण्डेय ने निश्चय किया कि माता-पिता के सुख के लिए उसी सदाशिव भगवान से दीर्घायु होने का वरदान लेंगे जिन्होंने जीवन दिया है। बारह वर्ष पूरे होने को आए थे।

मार्कण्डेय ने शिवजी की आराधना के लिए महामृत्युंजय मंत्र की रचना की और शिव मंदिर में बैठकर इसका अखंड जाप करने लगे।

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

समय पूरा होने पर यमदूत उन्हें लेने आए। यमदूतों ने देखा कि बालक महाकाल की आराधना कर रहा है तो उन्होंने थोड़ी देर प्रतीक्षा की। मार्केण्डेय ने अखंड जप का संकल्प लिया था।

यमदूतों का मार्केण्डेय को छूने का साहस न हुआ और लौट गए। उन्होंने यमराज को बताया कि वे बालक तक पहुंचने का साहस नहीं कर पाए।

इस पर यमराज ने कहा कि मृकण्ड के पुत्र को मैं स्वयं लेकर आऊंगा। यमराज मार्कण्डेय के पास पहुंच गए।

बालक मार्कण्डेय ने यमराज को देखा तो जोर-जोर से महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते हुए शिवलिंग से लिपट गया।

यमराज ने बालक को शिवलिंग से खींचकर ले जाने की चेष्टा की तभी जोरदार हुंकार से मंदिर कांपने लगा। एक प्रचण्ड प्रकाश से यमराज की आंखें चुंधिया गईं।

शिवलिंग से स्वयं महाकाल प्रकट हो गए। उन्होंने हाथों में त्रिशूल लेकर यमराज को सावधान किया और पूछा तुमने मेरी साधना में लीन भक्त को खींचने का साहस कैसे किया..?

यमराज महाकाल के प्रचंड रूप से कांपने लगे। उन्होंने कहा- प्रभु मैं आप का सेवक हूं। आपने ही जीवों से प्राण हरने का निष्ठुर कार्य मुझे सौंपा है।

भगवान चंद्रशेखर का क्रोध कुछ शांत हुआ तो बोले- मैं अपने भक्त की स्तुति से प्रसन्न हूं और मैंने इसे दीर्घायु होने का वरदान दिया है। तुम इसे नहीं ले जा सकते।

यम ने कहा- प्रभु आपकी आज्ञा सर्वोपरि है। मैं आपके भक्त मार्कण्डेय द्वारा रचित महामृत्युंजय का पाठ करने वाले को त्रास नहीं दूंगा।

महाकाल की कृपा से मार्केण्डेय दीर्घायु हो गए। उसके द्वारा रचित महामृत्युंजय मंत्र काल को भी परास्त करता है।

                   🕉️🔱!! हर हर महादेव !!🔱🕉️


Tuesday, 22 June 2021

योग पर कांग्रेस का प्रहार ।

योग पर कांग्रेस का प्रहार।
सनातन संस्कृति में अध्यात्म और योग का बहुत महत्व हैं। प्रकृति सजीव व निर्जीव वस्तुओं से बनी हैं। हवा, पानी और ऊर्जा के रूप में प्रकृति से सम्बंधित चीजो ने पृथ्वी पर हमारे अस्तित्व को संभव बनाया हैं।जीवन और प्रकृति के इसी संयोजक को पर्यावरण कहा गया हैं। योग हमारे पूर्वजो द्वारा हमे दिए उत्तम रत्नों में से एक हैं। मानव शरीर प्रकृति की सबसे उन्नत रचना हैं, और प्रत्येक मनुष्य का यह कर्तव्य है कि वो इसे स्वस्थ रखे।
लेकिन अंतराष्ट्रीय योग दिवस के दिन कांग्रेस के नेता योग दिवस में भी सांप्रदायिक रंग घुसाने की कोशिश में लग गए, यह बेहद निंदनीय है कि कोई नेता हमारी संस्कृति को अपमानित करे और उसपर लालक्षण लगाए। जब 2015 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में योग दिवस का प्रस्ताव भारत ने दिया तब लगभग 175 देशो ने इसका पुर जोड़ समर्थन किया। लेकिन जब हमारे देश का कोई नागरिक हमारी संस्कृति अपमान करता है तब दुनिया के सामने पूरा भारत अपमानित होता हैं।
मैं भारतीय नागरिक के तौर पर बड़ा अपमानित महसूस किया जब हमारे ही देश के लोग, हमारी संस्कृति का अपमान करते हैं। राजनीति अपनी जगह होनी चाहिए लेकिन उसे इस तरह भारत के नाम पर दुष्प्रचार फैला कर सही नही हैं। आप राजनीति कीजिए, हमारा देश लोकतांत्रिक प्रक्रिया से चलता है आपको राजनीति करने की पूरी छूट हमारी संविधान ने दिया, लेकिन ऐसी राजनीति न करे जिससे देश अपमानित हो जाए।
कुमार हर्ष।

Saturday, 12 June 2021

*सरकार से सवाल करने की बजाय समाधान खोजना होगा।* --- कुमार हर्ष



आज विश्व मानव जाति की इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदी, कोरोना महामारी का हम सामना कर रहे है। आज हमारी सबसे बड़ी चुनौती हमारे देश की जनसंख्या है, हमारे पास स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव था। लेकिन वर्तमान मोदी सरकार ने सत्ता में आने के बाद अनेक मेडिकल कॉलेज और एम्स खोले। इसका परिणाम हमे आज दिख रहा हैं।

जब जनवरी में वैक्सीनेशन अभियान की शरुआत हुई थी, तो एम्स के निदेशक समेत भारत के कई बड़े डॉक्टर ने टीका लगाकर स्वास्थ्य और सुरक्षा कर्मी के लिए अभियान को प्रारंभ किया था, लेकिन कई बड़ी विपक्षी पार्टियों ने ये कहकर भ्रम फैलाया कि इस वैक्सीन के लगाने से  नपुंशक हो जाते और ये किसी पार्टी विशेष की वैक्सीन हैं।
 जिस देश मे अभी भी बड़ी संख्या में लोग निरक्षर हो, वहां टिकाकरण को लेकर भ्रम पैदा करना कितना घातक हो सकता हैं?

ये जानते हुए भी इन लोगो ने भ्रम फैलाया है और आज ये लोग यह भ्रम फैलाने में लगे है कि भारत में वैक्सीन की कमी है। हमे यह समझना होगी कि सवाल उठाने से अच्छा अगर हम साथ मिलकर कार्य करें तो हम इस महामारी से जल्द विजय हों सकते हैं।
अभी हम सभी को मिलकर लोगो को वैक्सीन लगवाने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
कुमार हर्ष


(ये लेखक के अपने विचार है।)

विकसित भारत का बजट

( संसद में बजट प्रस्तुत करने से पूर्व राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू के साथ वित्त मंत्री श्रीमति निर्मला सीतारमण) सौ - राष्ट्...