Monday, 28 February 2022

सिंघेश्वर और महाशिवरात्रि।

   (मुख्य मंदिर बाबा सिंघेश्वर नाथ, मधेपुरा(बिहार)

            (मुख्य द्वार बाबा सिंघेश्वर मंदिर )

आज हम सभी महाशिवरात्रि का पावन त्योहार मनाएंगे।
मेरा शोभाग्य है कि में बाबा सिंघेश्वर नाथ के पावन धरती पर जन्म लिया। में आपको सिंघेश्वर के इतिहास के विषय मे जानकारी देना चाहता हूं।
कोशी के मध्य क्षेत्र में विराजित बाबा सिंघेश्वर नाथ शिवलिंग की प्राचीनता का काल निर्धारण अभी तक सुनिश्चित नही हो पाया है।
प्रशिद्ध लेखक श्री हरिशंकर श्रीवास्तव "शलभ" द्वारा रचित पुस्तक "शैव अवधारणा" और "सिंघेश्वर स्थान" विद्वानों की शवेशना कि मंजिल की और अग्रसर होने की दिशा में मिल का पत्थर सिद्ध होगा।

मंदिर का संचालन करने वाला स्वामित्व न्यास श्री सिंघेश्वर मंदिर न्यास समिति है, उसने वर्ष 1999ई० में एक स्मारिका जारी की थी। उसमें ये उल्लेख किया गया है।
"प्राचीन देवस्थलों की व्यवस्था का एक सा ही इतिहास रहा है। उनके प्रारंभिक काल मे उसकी देखरेख, व्यवस्था एव पूजा पाठ वहां के स्थानीय मूल निवासी ही करते रहे है। पर उन देवस्थलों की सिद्धि और ख्याति को सुनकर बाद में वहां पुजारी, पंडित और पंडा समाज पहुँच जाते है और धीरे धीरे वहां की व्यवस्था पर अपनी चतुराई से हावी होकर स्वयं पूजा पाठ के प्रभारी बन जाते है। सिंघेश्वर का शिवलिंग भी इसका अपवाद नही है। श्री सलभ ने अपनी उक्त पुस्तिका में लिखा है कि यहां के प्राचीन निवासी व्रात्य थे जो द्विजाति और उपनयन से च्युत थे। वे ब्राह्मणों के यज्ञ, पशु बलि और खर्चीले कर्मकांड के घोर विरोधी थे। वे शिवभक्त थे। 
शिव के पावन नगरी सिंघेश्वर की स्वतंत्रता आंदोलन में भी बड़ी भूमिका थी, जिसका उल्लेख श्री डॉ भूपेंद्र ना०यादव ने अपनी आलेख में किया। 
ये सभी बाते सिंघेश्वर के इतिहास के विषय मे थी। अब आपको हम महाशिवरात्रि के विषय मे बताऊंगा, शिवरात्रि से लगातार चार दिनों तक प्रातः आरती नही होती है। लेकिन दोपहर और रात्रि आरती जारी रहती है।
शिवरात्रि के दिन मंदिर में बहुत भीड़ रहती है ।
और मंदिर न्यास के आदेशानुसार दोपहर 3 बजे शिव जी का चांदी की प्रतिमा को बारात के लिए सजाकर मंदिर के गर्व गृह ले जाया जाता है। इसकी निगरानी न्यास करती है। उसके बाद गर्व गृह में पंडा समाज कई स्तुति, और अन्य स्त्रोत का उच्चारण किया जाता है। तत्पश्चात बाबा के प्रतिमा और शिवलिंग को गुलाल से भर दिया जाता है।
उसके बाद न्यास के पदाधिकारी द्वारा बारात रवाना किया जाता है। उसके बाद बाबा की बारात मंदिर परिसर से गौरीपुर (जहाँ मा पार्वती विराजमान है) वहा बारात जाती है।
वहां विधि विधान से पूजा के बाद बाबा की प्रतिमा वापस मंदिर आ जाती है। जिसे की मंदिर प्रांगण में स्थित मां पार्वती के मंदिर में रखा जाता है। उसके बाद बाबा की शिवलिंग का श्रृंगार और शादी की प्रक्रिया शुरू की जाती है। और श्रृंगार के पश्च्यात दूल्हे वाली पगड़ी पहनाई जाती है। ये पूजा लगातार चार दिनों तक यानी चौटारी तक होती है। और इसके बाद आरती की जाती है। फिर माँ पार्वती मंदिर में बाबा और मैया की फेरे होते है। और अन्य विशेष पूजा होती है। उसी दिन से विश्व विख्यात सिंघेश्वर मेले का प्रारंभ होता है। जो लगभग 1 महीने तक चलता है।
महाशिवरात्रि के एक दिन बाद जलधरी होता है इस दिन सभी श्रद्धालु आधी रात से बाबा के पट खुलने बाद जल अर्पण करते है। ऐसे ही ये पावन पर्व समाप्त होता है।
आप सभी को महाशिवरात्रि की बहुत बहुत शुभकामनाएं।- हर्ष

Friday, 4 February 2022

बाबा सिंघेश्वर का तिलकोत्सव।

      ( श्री सिंघेश्वर नाथ मंदिर (सिंघेश्वर) मंदिर)
प्रत्येक वर्ष वसंत पंचमी अर्थात सरस्वती पूजन के दिन महादेव बाबा सिंघेश्वर नाथ जी का तिलक उत्सव होता है, और महाशिवरात्रि को उनकी विवाह माँ पार्वती से विधि अनुसार किया जाता है। तिलक के दिन महादेव के शयन आरती में विशेष पूजा होती है। उस दिन बाबा को हल्दी से रंग किया हुआ वस्त्र बाबा को पहनाया जाता है, विशेष प्रकार के भोग बाबा को चढ़ाई जाती है। रंग , गुलाल से बाबा का स्नान कराया जाता है। और बाबा को तिलक लगाया जाता है। वसंत पंचमी से लेकर होली तक बाबा को विशेष रूप से गुलाल चढ़ाया जाता है। और शिवरात्रि को बाबा का विवाह (डोर) के माध्यम से मैया पार्वती से कराया जाता है। इस वर्ष मंदिर आम श्रद्धालुओ के बंद किया गया है, लेकिन बाबा के तिलक उत्सव का कार्यक्रम का सीधा प्रसारण मेरे फेसबुक और ट्विटर पर किया जाएगा।

Thursday, 20 January 2022

अमर जवान ज्योति बुझाई नही राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में विलीन किया गया है।

      ( राष्ट्रीय युद्ध स्मारक नई दिल्ली (file))
Blog- Kumar Harsh (Editor In Chief) Desh Ki Vaani
अमर जवान ज्योति की लौ को लेकर तरह-तरह की भ्रांतियां फैल रही हैं।

 यहाँ सही दृष्टिकोण है:

 अमर जवान ज्योति की लौ बुझ नहीं रही है।  इसे राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में ज्वाला में विलीन किया जा रहा है।
यह देखना अजीब था कि अमर जवान ज्योति की लौ ने 1971 और अन्य युद्धों के शहीदों को श्रद्धांजलि दी, लेकिन उनका कोई नाम वहां मौजूद नहीं है।  1971 और उससे पहले और बाद के युद्धों सहित सभी युद्धों के सभी भारतीय शहीद के नाम राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में रखे गए है। इसीलिए वहां शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करना एक सच्ची श्रद्धांजलि है। विडम्बना यह है कि जिन लोगों ने 7 दशकों तक राष्ट्रीय युद्ध स्मारक नहीं बनाया, वे अब हमारे शहीदों को स्थायी और उचित श्रद्धांजलि देने पर हंगामा कर रहे हैं।  

Monday, 15 November 2021

हिन्दू और हिंदुत्व

नमस्कार साथियो,
आज कुछ दिनों से आप देख रहे होंगे कि सभी राजनीतिक दल और नेताओं हिन्दू हिंदुत्व की बात कर रहे है, ये शुरू हुआ जब वरिष्ट अधिवक्ता और पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने अपनी नई किताब अयोध्या में हिन्दू और हिंदुत्व पर विवादित बयान दे दिया उन्होंने हिंदुत्व की तुलना बोको हराम और ISIS से की। जिसके समर्थन में पूरे कांग्रेस आ गयी ,और तो और वायनाड से कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने हिन्दू और हिंदुत्व को अलग बता दिया और कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने जय श्री राम कहने वालों को निशाचर बताया।
                (सौजन्य-  TWITTER)

                     इस मामले पर बीजेपी प्रवक्ता डॉ संबित पात्रा ने इसे हिन्दू धर्म पर प्रहार बताया, और इसे कांग्रेस की हिन्दू विरोधी सोच का परिणाम बताया और तो और बीजेपी के राज्य सभा सांसद डॉ सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि 2014 से पहले भारत आंशिक रूप से मुस्लिम राष्ट्र बताया।
     (फ़ोटो- डॉ संबित पात्रा (प्रवक्ता) बीजेपी)

जो लोग आज हिन्दू और हिंदुत्व को अलग अलग बता रहे है, उनसे में यह पूछना चाहूंगा कि यदि हिन्दू और हिंदुत्व अलग है तोह इस्लाम और इस्लामिस्ट भी अलग अलग होनी चाहिए ?
( श्रीमती सोनिया गांधी (अध्य्क्ष) भारतीय राष्ट्र कांग्रेस)
आज हिन्दू पर ऐसी टिप्पणी हिन्दू धर्म को मानने वालों को आहत करती है। ये लोग राजनीति के लिए कुछ भी कर सकते है, ये तोह कुछ नही जब इन्होंने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर राम के अस्तित्व पर सवाल उठाया था, बार बार हिन्दू समुदाय को आहत करने वाले बयानों पर कांग्रेस अध्य्क्ष श्रीमति सोनिया गांधी को कांग्रेस का स्टैंड बताना चाहिए।
           (सौजन्य- Times Of India)

 हमारी हिन्दू संस्कृति हमे सभी धर्मों का सम्मान करने कहता है। लेकिन जब भी हमारे धर्म पर कोई सवाल करता है तोह हमे 
" धर्मो रक्षति रक्षता: " के भावना रखते हुए, कोई हिंसा किये बगैर शांति पूर्ण तरीके से इसका विरोध जतानी चाहिए, लेकिन कल जो नैनीताल में कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद के घर पर हमला बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। 
   ( श्री राम लला विराजमान श्री अयोध्या धाम)
हमे न्यायपालिका पे भरोसा रखनी चाहिए, और माननीय न्यायालय को भी स्वत: संज्ञान लेकर दोषियों के खिलाफ कार्यवाही करनी चाहिए।

Sunday, 17 October 2021

कश्मीर में इन दिनों आतंकी हमले पर मेरा विचार।


(लाल चौक ) जम्मू कश्मीर 
सौजन्य- ANI
जम्मू कश्मीर में बार बार गैर कश्मीरी लोगो को मौत के घाट उतार रहे है आतंकी। ये गंभीर चिंता का विषय है कि बिहार और यूपी के मजदूरों को मारकर ये संदेश देना चाहते है आतंकी की कश्मीर गैर कश्मीरी के लिए सही जगह नही है। ये मुद्दा सोचने के लिए है कि कुछ राजनीतिक गिद्ध जैसे मुफ़्ती फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला जैसे कई राजनीतिक गिद्ध आतंकी के बचाओ में उतर जाते है। अब केंद्रीय सरकार से हम सभी देशवासियो की अपील है कि वो शख्त कार्यवाही करें। अन्यथा इसका परिणाम भारत के लिए घातक हो सकता है। कश्मीर के बहुसंख्यक समुदाय को भी इन सभी मुद्दों पर अल्पसंख्यक का साथ देना चहिये। पाकिस्तान को भारत सरकार द्वारा प्रचंड जबाब की आवश्यकता है। कृपया मेरी अपील है कि सभी राजनीतिक दल एक आकर भारतीय बने। इसमें राजनीत की आवश्यकता नही है। 

Wednesday, 6 October 2021

दुर्गा पूजा ( उत्सव )

हम सभी जानते है की दुर्गा पूजा भारत के सबसे लोकप्रिय पर्व है जो कि शक्ति की देवी माँ दुर्गा को समर्पित है।
इस अवसर पर में सभी देशवासियो को बहुत बहुत शुभकामनाएं देता हूँ।

माँ दुर्गा और एक मनुष्य में रिश्ता क्या है।
हमारे शास्त्रों में कहा गया है
'' कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता न भवति ''
( दुर्गासप्तशती (देव्यापरध्क्षमानस्त्रोतम ) श्लोक 4 के 2 लाइन )
इसका अर्थ है कि पुत्र कुपत्र हो सकता है, लेकिन माता कुमाता नही हो सकती है।
यही रिश्ता माँ जगदम्बे और एक मनुष्य में है।
दुर्गा पूजा 10 दिनों तक चलता है। इसमें माँ दुर्गा के 9 रूपो की पूजा की जाती है।
इसी पर श्री दुर्गासप्तशती में एक श्लोक है कि
प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।
तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम् ।।
पंचमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च।
सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम् ।।
नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा: प्रकीर्तिता:।
उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना ।। 
इसमें माँ के 9 रूपो का नाम अंकित है। ये सभी माँ के अलग अलग रूपो के कार्य को समर्पित है।
जैसा , की हम सभी इस बात से अवगत है कि, दुर्गा पूजा भारत मे सबसे ज्यादा लोकप्रिय बंगाल राज्य में है। क्योंकि बंगाल के इष्टदेव माँ दुर्गा है।

एक मानव के लिए इस त्योहार का मतलब है, की असत्य पर सत्य के विजय का त्योहार है दशहरा इसे विजयदशमी भी इसीलिए कहा जाता है।
दुर्गा पूजा में कई जगह मेले, खेलकुद और सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया जाता है । इसमें घर के बच्चे, बूढ़े पूजा पाठ के साथ इन सभी आयोजन का भी आंनद लेते है।

इस विषय पर में अपना व्यक्तिगत अनुभव भी साझा करना चाहता हूँ।
मेरे  घर के सभी लोग माँ की पूजा करने से पहले अलग अलग फूलो से माँ की पंडाल सजाते है। फिर माता को विराजमान कर उनकी पूजा करते है।
माँ दुर्गा जगतजननी को समर्पित ये त्योहार सभी के मन मे नई ऊर्जा का संचार करती है।
और दस वे दिन माँ को सम्मान और नम आंखों से उन्हें विसर्जन कर उनकी विदाई करते है।
में पुनः सभी देशवासियो को दुर्गा पूजा की शुभकामनाएं देता हूँ।

Thursday, 2 September 2021

अफगानिस्तान में तालिबान।

नमस्कार, आज पूरा विश्व दो बड़े चुनोतियाँ का सामना कर रहा है। पहली चुनोती है अफगानिस्तान में तालिबान का राज, और दूसरी चुनोती कोरोना महामारी है।


( काबुल एयरपोर्ट पे तालिबानी लड़ाके सौजन्य- ट्विटर)

आज अफगानिस्तान पर बात करने का समय है। आज हम सभी ये बात जानते है कि अमेरिका के जाने के बाद अफगानिस्तान में तालिबान ( आतंकी संगठन) का राज स्थापित हुआ है। जो कि सम्पूर्ण विश्व के लिए चिंता का विषय हैं। इस मामले पर भारत की अध्य्क्षता में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक हुई, अमेरिका और NATO देशों ने भी इस विषय पर चर्चा की । आज अफगानिस्तान में हम सभी जानते है कि वहाँ मानवाधिकारों का उलंघन हो रहा है। जिसका ज्यादातर देश (चीन और पाकिस्तान) के अलावा विरोध कर रहा है। 
( भारत के विदेेश मंत्री द्वारा UNSC की अध्य्क्षता )

इस मामले ( आज जो अफगानिस्तान में हो रहा हैं। ) ये अमेरिका की सबसे बड़ी नाकामी है। 
इसे आप कुछ महत्वपूर्ण पॉइंट में समझिए।

1.) जो अमेरिका अपने आप को महाशक्ति समझता है। वो आज तालिबान से डर कर अफगानिस्तान से भाग गया, आज अफगानिस्तान में मानवाधिकारों के उल्लंघन पर बरे बरे बुद्धिजीवी और लिब्रल्स चुप है। उसको अमेरिका एक प्रकार से चुप रहकर समर्थन कर रहा है।

2.) अफगानिस्तान के निह्ते नागरिकों को आतंक के हवाले छोर दिया है।
( अफगानिस्तान में अमरीका के सेना के शहीद होने के बाद राष्ट्रपति बाइडेन द्वारा श्रद्धांजलि)

( अमेरिका भविष्य में क्या कर सकता हैं।)

कई मीडिया रिपोर्ट्स ये दावा करती है कि, अफगानिस्तान में आज जो हो रहा है। उससे अमेरिका की छबि पूरे विश्व मे डूब गई है। तोह इस सबसे उभरने के लिए अमेरिका कुछ बड़ी कारवाही कर सकता है।
( White House Washington DC)
( भारत UNSC मैं ।) 

हम सभी जानते है कि अगस्त के माह में भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अध्य्क्ष बना हैं।
इसी बीच अफगानिस्तान में 14 अगस्त के बाद हालात खराब हुई। इस पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में डिबेट के दौरान भारत के विदेश मंत्री एस० जयशंकर ने कहा कि 
आतंकवाद दुनिया और मानवता के लिए खतरा  है। हमारे पड़ोसी देश होने के नाते हम यह चाहते है कि अफगानिस्तान की जमीन किसी और देश पर आतंकवाद के लिए इस्तमाल न हो। 
( UNSC की अध्य्क्षता करते डॉ एस जयशंकर)

( भारत के लिए तालिबान से खतरा)

भारत के लिए तालिबान खतरा ये है कि, कश्मीर जो कि भारत की ताज है। उसपर पाकिस्तान के गलत मंसूबे में तालिबान पाकिस्तान का साथ दे सकते हैं , ये सबसे बड़ा खतरा भारत के लिए हैं।
 
( भारत तालिबान के बीच पहली आधिकारिक बातचीत)

31 अगस्त को यह खबर आई कि भारत- तालिबान के बीच पहली आधिकारिक बातचीत हुई। 
इस बात का मतलब क्या?
इस बात का यह मतलब है कि भारतीय विदेश मंत्रालय द्वारा प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई ।
जिसमे विदेश मंत्रालय ने कहा कि
      ( विदेश मंत्रालय द्वारा प्रेस विज्ञप्ति)
Today, Ambassador Of India to Doha , deepak mittal meet Sher Mohammad Abbas , the head's of Taliban's poltical office in doha, The Meeting took place at the Embassy of India, Doha on the request of taliban side.

इसका मतलब है कि भारतीय दूतावास दोहा में राजदूत दीपक मित्तल , से तालिबान के राजनीतिक प्रमुख ने चर्चा की जिसमे भारतीयों की वापसी और भारत के खिलाफ अफगानिस्तान की जमीन का इस्तमाल न हो, ऐसी मांग रखी है।

अब हमें ये देखना है कि आगे क्या होता है।
धन्यवाद।

आगे बढ़ता रहे बिहार

बिहार दिवस – 22 मार्च : हमारी पहचान, हमारा गौरव, हमारा भविष्यआज 22 मार्च 2026। पूरे बिहार में उत्सव का माहौल है। ठीक 114 वर्ष पह...